
और हल
हर घर की क़ानूनी किताबथाना हो या तहसील, बैंक हो या अस्पताल —अब डर नहीं, आपको पता होगा क्या करना है।
FIR न लिखी जाए, ऑनलाइन ठगी, खतौनी-वरासत, ग़लत चालान, बिजली बिल, अस्पताल का बिल, तनख़्वाह न मिले — 75+ आम समस्याओं में आपके अधिकार, क़दम-दर-क़दम रास्ता, अधिकारी से क्या बोलें और कहाँ शिकायत करें।
- हर समस्या का "समाधान कार्ड" — कहानी, एक लाइन में जवाब, अधिकार, क़दम, काग़ज़, शिकायत की सीढ़ी
- संकट के पहले 60 मिनट — गिरफ़्तारी, दुर्घटना, ठगी, घर में मारपीट
- 20 तैयार आवेदन-पत्र + 33 हेल्पलाइन + मुफ़्त वकील कैसे मिले
✅ इस महीने 20+ लोगों ने यह किताब ली
जब हक़ आपका हो, पर रास्ता न पता हो…
ऐसे वक़्त लोग या तो डरकर चुप बैठ जाते हैं, या दलाल के हाथ में पैसे थमा देते हैं। दोनों में नुक़सान आपका।
"साहब नहीं हैं, कल आना।" तीन दिन से चक्कर। अब क्या करें — और थाने के बाद कहाँ जाएँ?
वीडियो कॉल पर वर्दी में कोई कहता है — आप गिरफ़्तार हैं, अभी पैसे भेजो। क्या ऐसा होता भी है? (नहीं होता।)
महीनों बाद भी खतौनी में उन्हीं का नाम। अर्ज़ी किसे दें, कौन-से काग़ज़ लगें?
"पहले नक़द जमा करो।" आपके अधिकार क्या हैं, और शिकायत कहाँ — आज ही, जब मरीज़ भर्ती है?
दो महीने की मज़दूरी बाक़ी, बस वादे। क़ानून क्या कहता है, और कौन-सा दफ़्तर सुनेगा?
जिस गाड़ी को आप चला ही नहीं रहे थे, उसका चालान — या ग़लत जुर्माना। चुपचाप भरें या आपत्ति करें — कैसे?
अभी आपकी परेशानी क्या है?
एक चुनें — और किताब का असली पन्ना देखें, बिल्कुल जैसा आपको मिलेगा।
और शिकायत की सीढ़ी — किताब में
थाने वाले FIR नहीं लिख रहे
⚖️ आपके अधिकार (कुछ)
- FIR किसी भी थाने में लिखवा सकते हैं, चाहे घटना कहीं की हो (ज़ीरो FIR) — थाना उसे सही थाने भेजेगा।
- FIR मौखिक, लिखित या ऑनलाइन (e-FIR) दे सकते हैं; e-FIR पर 3 दिन में जाकर दस्तख़त करने होते हैं।
ये 5 बातें हर घर को पता होनी चाहिए
किताब के "5 हथियार" और "संकट के 60 मिनट" वाले भागों से — याद रखिए, किसी दिन काम आएँगी।
कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी दफ़्तर से जानकारी, फ़ाइल की कॉपी और अपनी अर्ज़ी की स्थिति माँग सकता है। जवाब 30 दिन में देना होता है।
महिला, बच्चे, SC/ST, दिव्यांग, हिरासत में बंद व्यक्ति और कम आय वाले परिवार — सरकारी ख़र्च पर वकील के हक़दार हैं।
संज्ञेय अपराध की FIR किसी भी थाने में लिखवाई जा सकती है, घटना कहीं की भी हो। FIR की कॉपी मुफ़्त मिलती है।
ऑनलाइन ठगी हो तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और बैंक को बताएँ। जितनी जल्दी शिकायत, पैसा रुकने की उतनी उम्मीद।
आपसी सहमति से मामला निपटाएँ: कोर्ट फ़ीस नहीं लगती, पहले दी हो तो वापस मिलती है। फ़ैसला अंतिम होता है।
किताब में हर एक का पूरा तरीक़ा है — कहाँ, कैसे, कितने दिन में, और जवाब न आए तो अगला क़दम।
पढ़ें, समझें — और उसी दिन क़दम उठाएँ
लंबे क़ानूनी लेख नहीं। हर कार्ड इसी क्रम में — ताकि घबराहट में भी सीधा काम की बात मिले।
- 💬 कहानीअसली जैसी घटना — "क्या यह मेरी समस्या है?"
- ⚡ एक लाइन में जवाबसबसे ज़रूरी बात, सबसे पहले
- ⚖️ आपके अधिकारक़ानून आपको क्या देता है
- 👣 क़दम-दर-क़दमक्रम से क्या करें
- 🗣️ क्या बोलेंअधिकारी से विनम्र, पर मज़बूत बात
- 📄 साथ ले जाएँकाग़ज़ों की चेकलिस्ट
- 🏢 कहाँ जाएँदफ़्तर, हेल्पलाइन, पोर्टल
- ⛔ ग़लती न करेंजहाँ लोग अक्सर फँसते हैं
- 🔀 फ़्लोचार्टबड़े कार्डों में "अगर-तो" रास्ता
- 🪜 शिकायत की सीढ़ीसुनवाई न हो तो अगला दरवाज़ा
- ❌ ग़लतफ़हमी vs सचजो सब मानते हैं — पर सच नहीं
- ⚖️ क़ानून और स्रोतअधिनियम, धारा और आधिकारिक स्रोत
15 भाग — खेत से थाने तक, बैंक से मोबाइल तक
हर पन्ना — साफ़, रंगीन और काम का
चित्र, फ़्लोचार्ट, रंगीन डिब्बे और आसान भाषा। किसी भी पन्ने को दबाकर बड़ा करें।
← खिसकाकर और पन्ने देखें →
यह किताब किसके लिए है?
✅ आपके लिए है, अगर…
- जिसने कभी थाने, तहसील, बैंक या अस्पताल में ख़ुद को बेबस महसूस किया हो
- किसान, मज़दूर, महिलाएँ, बुज़ुर्ग — और घर का वो युवा जो सारे काग़ज़ी काम देखता है
- आप अपनी बात लिखकर, सही दफ़्तर में, सही तरीक़े से रखना चाहते हैं
- आप मुसीबत आने से पहले अपने हक़ जानना चाहते हैं, बाद में नहीं
❌ आपके लिए नहीं है, अगर…
- आप क़ानून से बचने, शॉर्टकट या केस से निकलने का रास्ता ढूँढ रहे हैं
- आप "पक्की जीत" की गारंटी चाहते हैं — कोई ईमानदार किताब यह वादा नहीं कर सकती
- आपका गंभीर मुक़दमा पहले से कोर्ट में है — किताब मदद करेगी, पर वकील से ज़रूर मिलें (मुफ़्त सरकारी वकील: 15100)
एक किताब, जो पूरे परिवार के काम आए
- 📘159 पन्नों की रंगीन PDF किताबमोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर पर पढ़ें — चाहें तो घर पर प्रिंट करें
- 🧭75+ असली समस्याएँ — हर एक का समाधान कार्डआपके अधिकार, क़दम-दर-क़दम रास्ता, क्या बोलें, क्या साथ ले जाएँ, कहाँ जाएँ
- 🚨संकट के पहले 60 मिनटगिरफ़्तारी, दुर्घटना, ऑनलाइन ठगी, घर में मारपीट, बच्चा खोना — अभी क्या करें
- 🛠️5 हथियार — हर समस्या में काम आएँRTI, शिकायत पोर्टल, मुफ़्त वकील, लोक अदालत, उपभोक्ता आयोग
- 📝20 तैयार आवेदन-पत्रख़ाली जगह भरें, दो कॉपी बनाएँ, जमा करें — और मुहर वाली रिसीविंग लें
- ☎️33 हेल्पलाइन, 34 सरकारी पोर्टलसाथ में साल भर का याद-कैलेंडर और काटकर रखने वाला "मेरा अधिकार कार्ड"
- 📚57 क़ानूनी शब्दों का आसान मतलब + स्रोततहसील, थाने, कोर्ट और बैंक में सुनाई देने वाले शब्द — अब डर नहीं
🎁 साथ में लें: हर अर्ज़ी तैयार — 64 अर्ज़ियाँ, हर एक का भरा हुआ नमूना + Word फ़ाइलें। चेकआउट पर सिर्फ़ ₹99 में जोड़ें। किताब कैसे मिलेगी?
आपके मन के सवाल
क्या यह किताब वकील की जगह ले सकती है?
नहीं, और यह ऐसा दावा भी नहीं करती। यह आसान शब्दों में सही क़ानूनी जानकारी देती है — आपके अधिकार, सही दफ़्तर, सही तरीक़ा और सही शब्द। गंभीर मामलों (गिरफ़्तारी, ज़मीन का मुक़दमा, तलाक़, बड़ी रक़म) में किताब ख़ुद कहती है कि वकील से मिलें — और 15100 से मुफ़्त सरकारी वकील कैसे मिलता है, यह भी बताती है।
जानकारी कितनी नई है?
अक्टूबर 2026 तक की जानकारी पर आधारित है, और 1 जुलाई 2024 से लागू नए आपराधिक क़ानूनों (BNS, BNSS, BSA) के अनुसार है। धाराएँ, समय-सीमा, हेल्पलाइन और पोर्टल आधिकारिक स्रोतों (India Code, PIB, RBI, NALSA, मंत्रालयों के पोर्टल) से जाँचे गए हैं। नियम बदलते हैं — किताब ख़ुद कहती है कि दफ़्तर/पोर्टल की ताज़ा जानकारी को अंतिम मानें।
मैं उत्तर प्रदेश में नहीं रहता — काम आएगी?
हाँ। केंद्र के क़ानून (पुलिस, FIR, ज़मानत, उपभोक्ता, बैंक, RTI, श्रम संहिताएँ, ऑनलाइन ठगी) पूरे देश में एक जैसे हैं। राज्य वाले मामलों (ज़मीन, बिजली, पेंशन, राशन) में मुख्य उदाहरण UP के हैं, और 📌 वाले डिब्बे बताते हैं कि दूसरे राज्यों में क्या अलग हो सकता है।
"समाधान कार्ड" क्या है?
हर समस्या का अपना कार्ड: एक छोटी असली जैसी कहानी, एक लाइन में जवाब, आपके अधिकार, क़दम-दर-क़दम क्या करें, अधिकारी से क्या बोलें, क्या साथ ले जाएँ, कहाँ जाएँ, आम ग़लतियाँ, ग़लतफ़हमी बनाम सच, और सुनवाई न हो तो शिकायत की सीढ़ी। बड़े कार्डों में "अगर-तो" फ़्लोचार्ट और अपनी शिकायत लिखने का पन्ना भी।
किताब किस भाषा में है?
आसान हिंदी में — जैसी घर में बोली जाती है। FIR, RTI, पोर्टल जैसे आम अंग्रेज़ी शब्द वैसे ही रखे हैं। यही किताब English में भी अलग से मिलती है — ऊपर 🌐 बटन से बदलें।
किताब कैसे मिलेगी? छपी हुई आएगी?
यह डिजिटल PDF है। पेमेंट होते ही डाउनलोड का बटन खुलता है, और लिंक ईमेल व WhatsApp पर भी आता है। कोई डाक-ख़र्च या इंतज़ार नहीं। चाहें तो घर पर प्रिंट करें।
चेकआउट पर "हर अर्ज़ी तैयार" क्या है?
एक वैकल्पिक ऐड-ऑन: 13 विभागों की 64 तैयार अर्ज़ियाँ और शिकायत-पत्र, हर एक का भरा हुआ नमूना, और Word फ़ाइलें जिन्हें मोबाइल/कंप्यूटर पर भरकर प्रिंट कर सकते हैं। चेकआउट पर ₹99 में जोड़ सकते हैं — मुख्य किताब इसके बिना भी पूरी है।
पेमेंट सुरक्षित है? बिल मिलेगा?
पेमेंट Razorpay से होता है — UPI, कार्ड, नेट-बैंकिंग, वॉलेट। आपका कार्ड या बैंक विवरण हमारे पास नहीं आता। हर ऑर्डर पर GST बिल मिलता है।
PDF पर मेरा नाम क्यों छपता है?
हर ख़रीदार की प्रति पर उसका नाम और एक अलग Copy ID छपता है, ताकि किताब आगे न बाँटी जाए। पढ़ने में कोई रुकावट नहीं।
डाउनलोड न हो या PDF न खुले तो?
तो 7 दिन के अंदर बताइए — हम नया लिंक भेजेंगे या पूरा पैसा लौटाएँगे। WhatsApp या ईमेल पर सीधे हमसे बात कर सकते हैं।
मुसीबत बताकर नहीं आती —
पर तैयारी आज हो सकती है।
आज ही फ़ोन में रख लीजिए — ताकि जिस दिन ज़रूरत पड़े, उस दिन आप घबराएँ नहीं, सही क़दम उठाएँ। घर के बड़ों और बच्चों को भी बताइए।
हर घर की क़ानूनी किताब — ₹299तुरंत डाउनलोड · GST बिल · 7 दिन का वादायह किताब का असली पन्ना है · पूरी किताब ₹299 में
किताब किस भाषा में चाहिए?Which language would you like?
दोनों में वही समस्याएँ और फ़ॉर्मेट — बस भाषा अलग।
Same problems and formats — only the language differs.
हर अर्ज़ी तैयार
148 पेज · PDF + Word फ़ाइलें · सिर्फ़ ₹99
बाक़ी पेज किताब में
बाक़ी पेज किताब में
👉 पेज बाएँ-दाएँ खिसकाकर देखें
किताब के 6 हिस्से
- पुलिस, कोर्ट और नोटिसFIR तहरीर, SP को शिकायत, गुमशुदगी, मुफ़्त वकील, शपथ-पत्र, क़ानूनी नोटिस
- ज़मीन, खेती और सड़कवरासत, खतौनी सुधार, पैमाइश, क़ब्ज़ा, फ़सल बीमा, ई-चालान, हिट-एंड-रन
- पंचायत, बिजली, स्कूलप्रधान की शिकायत, आवास, रोज़गार, बिल सुधार, कनेक्शन, RTE, TC, छात्रवृत्ति
- बैंक, उपभोक्ता, अस्पतालठगी, KYC, रिकवरी एजेंट, बीमा क्लेम, उपभोक्ता आयोग, आयुष्मान, मेडिकल रिकॉर्ड
- नौकरी, महिला, बुज़ुर्गबकाया वेतन, PF, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण, POSH, पेंशन, UDID
- RTI, राशन, दफ़्तरRTI, प्रथम अपील, राशन, जनसुनवाई, रिश्वत की शिकायत, सेवा में देरी
नमूने में कुछ पेजों का निचला हिस्सा जान-बूझकर धुंधला है — ख़रीदने पर पूरी किताब साफ़ मिलेगी।
